बौद्ध कथा में सिद्धार्थ के गृह त्याग प्रसंग से भावविभोर हुए श्रद्धालु
बिल्सी के गड़रपुरा में बुध्दकथा का तीसरा दिन
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गड़रपुरा में आयोजित सात दिवसीय बौद्ध कथा के दौरान कथावाचक राजेश्वरी बौध्द ने रविवार को भगवान गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने भगवान सिद्धार्थ के गृह त्याग प्रसंग को भावनात्मक और प्रेरक शैली में श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथावाचक ने बताया कि राजकुमार सिद्धार्थ सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण राजमहल में रहते हुए भी मानव जीवन के दुख, रोग, बुढ़ापा और मृत्यु के यथार्थ से व्यथित थे। संसार के दुखों से मुक्ति का मार्ग खोजने के लिए उन्होंने पत्नी यशोधरा और पुत्र राहुल सहित समस्त राजवैभव का त्याग कर तप और साधना का मार्ग अपनाया। उन्होंने कहा कि गृह त्याग केवल संन्यास नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए किया गया महान संकल्प था। कथा के दौरान कथावाचक ने भगवान बुद्ध के करुणा, अहिंसा और मध्यम मार्ग के सिद्धांतों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आज के भौतिकवादी युग में भगवान बुद्ध के विचार समाज को शांति और सद्भाव का मार्ग दिखाते हैं। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों व श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। इस मौके पर हरवीर शाक्य, चन्द्रपाल, किशन पाल, मोहनलाल, हरविलास, पानसिंह,सुनील ,श्यामवीर, रामवीर, शिशुपाल आदि मौजूद रहे।
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