शीत पित्ती का घरेलू ईलाज
शीत पित्ती (Urticaria या Hives) के इलाज के लिए आयुर्वेदिक और आधुनिक दोनों प्रकार के तरीके उपलब्ध हैं। आयुर्वेद में शीत पित्ती के उपचार में नियमित रूप से गिलोय, हल्दी, आंवला और नीम का सेवन करना लाभकारी होता है। नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर नहाना, शरीर पर नारियल तेल लगाना और ऐलोवेरा जेल का उपयोग करना भी शीत पित्ती में आराम पहुंचाता है। इसके अलावा, खान-पान में तले हुए, भुने हुए, मसालेदार और नमकीन खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए तथा आमला, हल्दी, नीम जैसी चीजों का सेवन बढ़ाना चाहिए। पंचकर्म जैसी आयुर्वेदिक चिकित्सा भी शीत पित्ती के लिए प्रभावी हो सकती है।
होम्योपैथिक उपायों में कैम्फोरा दवा शीत पित्ती के लिए उपयोगी है, खासकर उन लोगों के लिए जो ठंड के प्रति संवेदनशील होते हैं। शीत पित्ती के तीव्र मामले में आंटिहिस्टामिन दवाओं का उपयोग होता है जिनसे खुजली और लाल चकत्ते कम हो सकते हैं। गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह से सिस्टेमिक ग्लूकोकॉर्टिकायड्स और दूसरे विशेष आंटिहिस्टामिन्स भी दिये जाते हैं।
नियमित आयुर्वेदिक उपायों के साथ साथ साफ-सफाई बनाए रखना, स्वस्थ भोजन करना और ठंड से बचाव करना शीत पित्ती के नियंत्रण में सहायक होता है।
संक्षेप में, उपचार के उपाय हैं:
- आहार में हल्दी, नीम, गिलोय, आंवला शामिल करें
- नीम के पत्ते पानी में उबाल कर नहाएं
- शरीर को नारियल तेल से मालिश करें
- ऐलोवेरा जेल त्वचा पर लगाएं
- तले और मसालेदार भोजन से बचें
- होम्योपैथिक दवा जैसे कैम्फोरा लें (डॉक्टर की सलाह से)
- खांसी, खुजली के लिए आंटिहिस्टामिन दवाएं लें
- गंभीर या पुरानी स्थिति में पंचकर्म और विशेषज्ञ परामर्श लें
Follow us